punjab kesari jalandhar vs state of punjab: इस कानूनी संघर्ष में कहाँ हुई punjab kesari jalandhar से गलती, क्यों उठ रहे हैं state of punjab की करवाई पर गंभीर सवाल, कौनसे हैं basic facts..

जालंधर(29/03/2026): पढ़ने वालों को बता दें की कुछ दिनों पहले पंजाब केसरी समाचार पत्र ग्रुप से जुड़े एक होटल को जालंधर नगर निगम ने बुलडोज़ करने की कोशिश की, पंजाब केसरी ग्रुप तुरंत पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट पंहुचा रात को 10 बजे हाई कोर्ट ने रोक लगाईं तब जाके जालंधर निगम के अधिकारीयों ने होटल में तोड़ फोड़ का काम बंद किया, वहीँ दूसरी तरफ लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इस कदम के विरोध में धरना प्रदर्शन किया जिसके बाद पंजाब पुलिस ने कई सारे विपक्षी नेताओं को उठाके ठाणे ले गई इसके बाद कुछ पर मामला भी दर्ज किया गया फिर सबको जमानत पर छोड़ दिया गया

इतना मामला सुर्ख़ियों में रहा जिसकी वजह से लोगों को इतना ही पता भी है, इस आर्टिकल को अंत तक पढ़िए इसमें आज हम इस बात पर  चर्चा करेंगे की पंजाब सरकार और पंजाब केसरी ग्रुप में चल रही कानूनी लड़ाई से जुड़े फैक्ट्स क्या क्या हैं और कौनसी पार्टी कितना सही और कितना गलत दिख रही है

 इस मामले से जुड़ा एक आर्डर 17/03/2026 को सामने आया है यह आर्डर जालंधर की निचली अदालत का है ये आर्डर एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज डॉक्टर दीप्ति गुप्ता की अदालत ने दिया है इसमें सामने आया है की पंजाब केसरी ग्रुप ने इस अदालत में एक अपील डाली थी जिसमे 2 प्रमुख टेक्निकल ग्राउंड्स पर रिलीफ माँगा गया था, पहली ग्राउंड थी की पंजाब केसरी ग्रुप को मामले से जुड़ा विभाग का नोटिस नहीं मिला है और दूसरा की पंजाब केसरी ग्रुप को इस मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका तक नहीं मिला है इस लिए उनके होटल के खिलाफ डिमोलिशन करवाई के लिए दिए गए आर्डर को रद्द किया जाए

इस आर्डर में लिखा है की पंजाब केसरी ग्रुप को यह होटल बनाने के लिए परमिशन 28/04/2011 को मिली थी और ग्रुप ने यह होटल कंस्ट्रक्शन पूरी करके 31/07/2024 को विभाग को फाइल डिपाजिट करवा दी थी, इसी दौरान ग्रुप को पता लगा की होटल बनाने के समय सामने के एरिया में 20% एरिया सेट बैक(खाली छोड़ना) होता है पर किसी टेक्निकल एरर की वजह से 20% की जगह कुल 15.37% एरिया खाली छोड़ा गया है जबकि 20%एरिया खाली छोड़ना था मतलब 4.63% एरिया ज्यादा कंस्ट्रक्शन के अंदर आगया है जिसके लिए पंजाब केसरी ग्रुप ने निगम को पत्र लिख कर थोड़ी छूट मांगी थी पर इस पत्र का जवाब देने में विभाग ने महीनो का समय लगा दिया और 06/11/2025 को पजाब केसरी ग्रुप को विभाग से एक जवाब आया की आपकी छूट देने की मांग को ख़ारिज कर दिया गया है और अब आपको अपने खर्च पर कंस्ट्रक्शन के अंदर गए 4.63% एरिया को खाली करवाना होगा इस काम के लिए एक माह का समय दिया गया था, पंजाब केसरी ग्रुप ने अदालत को बताया की होटल की इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई 14/01/2026 को बिजली विभाग ने पहले ही काट दिया था तब से ही होटल बंद पड़ा है और उसमे कोई कमर्शियल एक्टिविटी नहीं चल रही है, इसके आगे पंजाब केसरी ग्रुप का कहना है की 05/02/2026 को बिना कोई नोटिस दिए और बिना कोई सुनवाई का मौका दिए पंजाब सरकार ने होटल को सील भी कर दिया था और उसके अगले ही दिन होटल के खिलाफ डिमॉलिश आर्डर जारी कर दिया गया है, साथ ही ग्रुप का कहना है की जो डिमॉलिश आर्डर जारी किया गया है वो प्रॉपर कम्पीटेंट अथॉरिटी द्वारा जारी नहीं किया गया है

अदालत ने पाया की 26/09/2024 को चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड ने जालंधर के म्युनिसिपल कारपोरेशन के कमिश्नर को एक पत्र लिख कर सेट बैक एरिया को लेकर छूट मांगी थी इस पत्र में होटल ने माना है की सेट बैक के तौर पर 20% एरिया छोड़ना था पर छोड़ा गया एरिया सिर्फ 15.37% है इससे साफ़ पता चलता है की ग्रुप को पहले से अपनी गलती का पता था, अदालत ने कहा है की यह जो अपील हम सुन रहे है उसमे 3 अपीलकर्ता है पहले चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड, दूसरा होटल के मालिक श्री अविनाश चोपड़ा और तीसरे अमित चोपड़ा और तीनो की तरफ से पावर ऑफ़ अटॉर्नी एक ही आदमी ने दी है जिनका नाम है विवेक प्रकाश पांडे इससे साफ़ पता चलता है की पूरे मामले की जानकारी होटल मैनेजमेंट से लेकर होटल के मालिकों सबको है, अदालत ने आगे कहा है की अगर अपनी गलती की जानकारी अगर पार्टी को पहले से है तो इस बात का क्या मतलब की उन्हें बार बार एक ही बात के लिए सुनवाई का मौका दिया जाए, अगर काम से काम एक बार सुनवाई का मौका दिया जा चुका है तो किसी भी नए नोटिस और दुबारा या इससे ज्यादा बार अपीलकर्ता को सुनने का कोई लीगल मतलब नहीं है

 इसके इलावा होटल के मालिकों ने पंजाब सरकार से एक और मांग की थी की उन्हें पंजाब यूनिफाइड बिल्डिंग रूल्स 2025 के तहत बिल्डिंग को होटल से बदल कर कमर्शियल बिल्डिंग के तहत मान्यता दी जाए, इस रूल के तहत अगर बिल्डिंग का 10% हिस्सा भी सेटबैक के लिए छोड़ दिया गया है तो काफी है इस रूल्स के तहत सभी कमर्शियल बिल्डिंग्स आती है बस फैक्ट्री बिल्डिंग्स को इस रूल के तहत छूट नहीं मिली है, ग्रुप ने यह तक भी कहा था की अगर इस रूल के तहत उन्हें मंजूरी दी जाती है तो वो बिल्डिंग को होटल के तहत इस्तेमाल करते हुए सिर्फ कमर्शियल बिल्डिंग के तहत इस्तेमाल कर लेंगे, अब इस मांग पर पंजाब सरकार का कहना है की रूल्स 2025 उन बिल्डिंग्स पर लागू नहीं होते जिन्हे अनुमति साल 2025 से पहले मिली हो और जिनका निर्माण कार्य साल 2025 से पहले पूरा हो चूका हो, ऐसी बिल्डिंग्स पर वही रूल्स लागु होंगे जो अनुमति पाने के समय लागु थे मतलब पुराने रूल्स लागु होंगे नाकि 2025 के रूल्स, रूल्स 2025 के सब रूल 16 के मुताबिक अगर कोई बड़ा बदलाव की अनुमति देनी भी है तो वो अगर कंस्ट्रक्शन चल रही हो तभी दी जा सकती है पर इस मामले में तो बिल्डिंग का काम साल 2024 में ही पूरा हो चूका था और ये नए नियम ही साल 2025 में आए हैं, पंजाब सरकार ने आगे कहा है की ग्रुप ने जो मांग की है कार्रवाई करने का अधिकार सिर्फ कम्पीटेंट अथॉरिटी को है तो उसका आसान सा जवाब है की पंजाब म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट, 1976 की धारा 408 के मुताबिक अगर कारपोरेशन कमिश्नर अपने से किसी जूनियर अधिकारी को कोई कार्य करने की अनुमति देता है तो वो कानून के हिसाब से सही मानी जाएगी और इस एक्ट की धारा 409 के मुताबिक कारपोरेशन कमिश्नर द्वारा दी गई कोई पावर, आर्डर, लाइसेंस और परमिशन कानून के हिसाब से ठीक मानी जाएँगी, इसलिए ग्रुप द्वारा कहना की जो नोटिस जारी किया गया है उसपे कम्पीटेंट अथॉरिटी के सिग्नेचर नहीं है या फिर डिमोलिशन की कार्रवाई कोई जूनियर अधिकारी की देख रेख में नहीं की जा सकती इन दोनों बातों का कानून की नजर कोई ठोस मतलब नहीं रह जाता है, पंजाब सरकार के वकीलों ने हाई सपोर्ट को बताया है होटल में 16 feet x 27 feet के रूम बनाये गए है जो की बिल्डिंग कानूनों के हिसाब से गलत है

अब बात करतें हैं उन पॉइंट्स पर जिनको देखने पे पंजाब सरकार की नियत पर शक पैदा होता है, पहली बात, जैसा की चोपड़ा होटल प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत को बताया है की डिमॉलिश के आर्डर पर शाम 5 बजे का समय है और डिमॉलिश करने वाली टीम उसी दिन 5.30 pm पर पहुंच जाती है अब जनता को जरा सोचना चाहिए की जो विभाग गंभीर से गंभीर मामलों में सालों तक कार्रवाई करने की सोचता तक नहीं वही विभाग सिर्फ आधे घंटे में होटल को डिमॉलिश करने पहुंच गया इससे लगता है की विभाग पर काफी दबाव रहा होगा, दूसरी बात ये है की होटल के सामने वाले हिस्से का 5% से भी कम एरिया का डिस्प्यूट है, तीसरी और सबसे जरुरी बात की 29/01/2026 को मानयोग सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने इसी होटल से जुडी एक रिट के आर्डर में स्टेटस क्वा मेन्टेन करने को दोनों पार्टीज को आर्डर दिए थे, अब डिमॉलिश वाले आर्डर के समय भी अपील करने वाली और रेस्पोंडेंट दोनों पार्टीज भी पहले वाली है तो सरकार को चाहिए था की कमसे कम चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को एक बार पहले हाई कोर्ट और सुप्रीम जाने देना चाहिए था अगर इस बार भी चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से खाली हाथ लौटना पड़ता तो सरकार डिमॉलिश की कार्रवाई बड़े शोंक से कर सकती थी पर सुप्रीम कोर्ट के 29/01/2026 के आर्डर का सम्मान करना बेहद जरुरी था, डिमॉलिश की कार्रवाई के समय रात को हाई कोर्ट की सुनवाई और रात 10 बजे डिमॉलिश को रोकने का हाई कोर्ट का आर्डर पंजाब सरकार और विभाग मुन्सिपल कॉपोरेशन के इस डिमॉलिश वाले कदम पर सवालिया निशान जरूर लगाता है

आखरी बात अब चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड फिर से सुप्रेमम कोर्ट पंहुचा है इस बार चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से 2 senior advocate पेश होंगे जिनमे senior advocate कपिल सिब्बल और senior advocate अभिषेक मनु सिंघवी शामिल हैं, अब जरा सोचिये की अभिषेक मनु सिंघवी अरविन्द केजरीवाल के ख़ास वकील है और पंजाब में सरकार का पूरा कण्ट्रोल अरविन्द केजरीवाल के ही हाथों में हैं ऐसे में senior advocate अभिषेक मनु सिंघवी का चोपड़ा होटल प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से कोर्ट में बहस करना किस तरफ इशारा करता है इस बात पर जनता अपनी राय खुद बनाए, बाकी रही बात सही गलत की तो चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड ने कानूनी कदम ढंग से और समय पर उठाये ही नहीं है इस लिए उनका केस ठीक से चल नहीं सका है, पूरे केस पेपर्स को पढ़ने पर एक बात सामने आती है की सरकार ने जिन छोटे छोटे पॉइंट्स को आधार बना के चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को निशाने पर लिए है वो अपने आप में सवाल खड़े करते है

Note: आर्टिकल के नीचे दी गई तस्वीर इंटरनेट से ली गई है इस तस्वीर का किसी भी तरह से कोई कमर्शियल इस्तेमाल नहीं किया गया है, तस्वीर का इस्तेमाल जनता को सूचना देने के तौर पर किया गया है 



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