जालंधर(31/12/2025): दोस्तों हम लोग पंजाब के शहर जालंधर से हैं, इस शहर में एक प्राइवेट हॉस्पिटल है जिसका नाम सर्वोदया हॉस्पिटल है इस हॉस्पिटल के कुछ पार्टनर्स जो खुद भी डॉक्टर्स है के खिलाफ इसी हॉस्पिटल के एक अन्य पार्टनर रहे डॉक्टर जिनका नाम पंकज त्रिवेदी है की शिकायत पर जालंधर की अदालत ने जालंधर पुलिस को सर्वोदया हॉस्पिटल के पार्टनर्स डॉक्टर कपिल गुप्ता, डॉक्टर राजेश अग्रवाल, डॉ संजय मित्तल, डॉ अनवर इब्राहिम खान और संदीप कुमार सिंह(पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट) के खिलाफ आई पी सी की धारा 420, 465, 467, 468, 471, 477A and 120B के तहत एक ऍफ़ आई आर दर्ज करने का एक आर्डर 22/12/2025 को दिया है इस आर्डर के आते ही जालंधर के कुछ पत्रकारों ने मानो इन सभी डॉक्टर्स को जैसे कन्विक्ट की तरह ट्रीट करना शुरू कर दिया और बिना सोचे समझे और पढ़े सनसनी खेज रिपोर्टिंग शुरू कर दी थी, इतनी सूचना लीड के तौर पर काफी है
आगे की स्टोरी में हम लोग सबूतों के साथ इस मामले से जुड़े कुछ फैक्ट्स जनता के सामने रखेंगे और कुछ ऐसे सवालों को भी बे पर्दा करेंगे जिनके बारे अभी तक जनता अनजान ही है, मामला अभी subjudice है इस लिए हम लोग अदालत की प्रक्रिया का सम्मान करते हुए किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की कोशिश बिलकुल नहीं करेंगे बस मामले से जुड़े कुछ सवालों पर ही रौशनी डालेंगे
ज्यादातर लोगों के ये नहीं पता होगा की इससे पहले एक ऍफ़ आई आर नंबर: 139, dated: 26/10/2021, अंडर सेक्शंस: आई पी सी: 420, 406, 465, 467, 468, 471 और 120B के तहत डॉ पंकज त्रिवेदी के खिलाफ दर्ज है जिसे डॉक्टर राजेश अग्रवाल पक्ष के बयानों पर दर्ज किया गया था, इस मामले में आरोप लगाया गया था की उस समय डॉ पंकज त्रिवेदी सर्वोदय हॉस्पिटल का न्यूरो विभाग हेड कर रहे थे पर उन्होंने अपने बाकी के पार्टनर्स को बताये बिना ही न्यूरो के पेशेंट्स को एक अलग बिल जेनरेट करके देना शुरू कर दिया और न्यूरो विभाग में आए पेशेंट्स की फीस खुदके पास रखनी शुरू कर दी थी इस काम के लिए डॉ पंकज त्रिवेदी ने एक अलग स्टाफ भी रख लिया था, इस स्टाफ के लिए भी उन्होंने अपने बाकी के पार्टनर्स की मंजूरी नहीं ली थी, ये ऍफ़ आई आर भी डी ये लीगल की रिपोर्ट के आधार पर ही दर्ज की गई थी, इसी ऍफ़ आई आर को जालंधर पुलिस ने बाद में ख़ारिज करने की कोशिश की है जिसे अभी तक अदालत ने पेंडिंग रखा हुआ है और डॉक्टर राजेश अग्रवाल से सबूत मांगे हैं की कौन से वो सबूत हैं जिनसे ये साबित हो सके की यह ऍफ़ आई आर ख़ारिज नहीं की जा सकती है और मामले की अगली सुनवाई 09/02/2026 को होनी है इसका मतलब है की यह ऍफ़ आई आर अभी तक ख़ारिज नहीं हुई है, अब सवाल खड़ा होता है की डी ये लीगल ने इस ऍफ़ आई आर की सिफारिश किन सबूतों पर की थी आज अगर यह ऍफ़ आई आर पुलिस को गलत लग रही है तो इस ऍफ़ आई आर को साल 2021 में दर्ज ही क्यों किया गया था, एक शक खड़ा होता है की उस समय पुलिस ने कही किसी दबाव में यह ऍफ़ आई आर दर्ज तो नहीं की थी, अदालत को इस बात का भी ध्यान रखना होगा की इस मामले में किसी राजनीतिक हस्ती, किसी समाचार पत्र के मालिक या किस मीडिया प्रधान का दबाव या पहले या अब तो नहीं है, इस मामले में साफ़ सा लॉजिक है की अगर डॉ राजेश अग्रवाल द्वारा लगाया गया आरोप सही है तो यह ऍफ़ आई आर खरिज कैसे हो सकती है यह लॉजिक जालंधर पुलिस की नियत पर गंभीर शक खड़े करता है, वो बात अलग है की डॉ पंकज त्रिवेदी ने लगाए गए इल्जाम वाली बातों के लिए सर्वोदय हॉस्पिटल के बाकी के पार्टनर्स से अनुमति ली हो तो यह ऍफ़ आई आर ख़ारिज होने की संभावना जरूर रहेगी वरना हमें नहीं लगता की यह ऍफ़ आई आर ख़ारिज होनी चाहिए, बाकी जज साहिब का फैसला ही फाइनल माना जाना चाहिए
इसके इलावा डॉ पंकज त्रिवेदी ने डॉ राजेश अग्रवाल पक्ष के कुछ लोगों के खिलाफ एक सिविल सूट नंबर: 1945/2020, सेक्शन: स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट 38 के तहत जालंधर की अदालत में डाला था जिसे अदालत ने काफी डेट्स देने के बाद इस आधार पर ख़ारिज कर दिया की डॉ पंकज त्रिवेदी ने इस केस को साबित करने के लिए कोर्ट में अपनी हाजरी नहीं दी, मतलब केस को साबित नहीं कर सके, ऐसे में अगर डॉ पंकज त्रिवेदी के पास इस केस को साबित करने के सबूत नहीं थे तो उन्होंने यह केस डाला ही किस नियत से था यह कदम भी डॉ पंकज त्रिवेदी की तरफ उंगली उठाता है इससे ऐसा लगता है की उन्होंने यह केस क्लीन हैंड से नहीं डाला था
इसी तरह से एक अन्य सिविल सूट नंबर: CS : 2400/2020 भी डॉ पंकज त्रिवेदी ने डॉ राजेश के पक्ष के खिलाफ जालंधर की एक अदालत में स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट 38 एंड 39 के तहत डाला था आगे चलकर इस केस को भी अदालत को इस आधार पर ख़ारिज करना पड़ा की डॉ पंकज त्रिवेदी काई सारी डेट्स लेने के बाद इस केस को साबित करने नहीं आए, अब एक सवाल यह भी उठता है की डॉ पंकज त्रिवेदी क्या सेम पार्टीज के खिलाफ सेम लीगल डिस्प्यूट की सीरीज में सिविल और क्रिमिनल रिलीफ दोनों लेना चाहते हैं
इन सब बातों से पहले भी जालंधर पुलिस ने एक ऍफ़ आई आर नंबर: 127, dated: 23/09/2019, डॉ पंकज त्रिवेदी और डॉ राजेश अग्रवाल दोनों ही के खिलाफ दर्ज की थी इसमें डॉ राजेश अग्रवाल ने आरोप लगाया था की डॉ पंकज त्रिवेदी ने उनके OPD रूम में आके उनके साथ गंभीर मार पीट की थी इस मामले में जालंधर पुलिस ने डॉ पंकज त्रिवेदी के खिलाफ जालंधर की अदालत से सेक्शन आई पी सी 307 जोड़ने की मांग की थी जिसे पूरी सुनवाई के बाद अदालत ने मना कर दिया था, इस ऍफ़ आई आर में जालंधर पुलिस ने डॉ पंकज त्रिवेदी और डॉ राजेश अग्रवाल दोनों के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की हुई है
बात एहि नहीं रूकती, इन सब बातों के इलावा डॉ पंकज त्रिवेदी ने सर्वोदय हॉस्पिटल के खिलाफ एक सिविल सूट स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट 38 और 40 के तहत जालंधर की एक अदालत में डाल रखा है जिसकी अगली डेट 23/02/2026 है, यह केस अभी पेंडिंग है इस लिए इस केस से जुडी कोई डेटल हम अभी आपके सामने नहीं रख रहे केस का फैसला आने के बाद इसकी डिटेल भी जनतक की जाएगी
ऐसे ही एक और सिविल सूट डॉ पंकज त्रिवेदी ने सर्वोदय हॉस्पिटल के खिलाफ स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट 38 और 39 के तहत जालंधर की अदालत में दाखिल कर रखा है जिसकी अगली सुनवाई 12/01/2026 को होनी है, यह केस भी अभी अदालत में चल रहा है
इसी तरह डॉ पङकज त्रिवेदी ने सर्वोदय हॉस्पिटल के एक अन्य पार्टनर डॉ कपिल गुप्ता के खिलाफ एक क्रिमिनल कंप्लेंट जालंधर की अदालत में डाल रखी है यह कंप्लेंट मानहानि की धारा सेक्शन 500 के तहत है, यहां भी सवाल खड़ा होता है की क्यों एक इतना पढ़ा लिखा डॉ एक अन्य डॉ के खिलाफ मानहानि जैसी धारा जो लोकतान्त्रिक देश में विवाद की वजह लम्बे समय से बनी हुई है का इस्तमाल कर रहा है, पता नहीं डॉ पंकज त्रिवेदी को यह बात पता है या नहीं की दुनिया भर में कई सारे NGO मानहानि की धारा को कानून की किताबों से हटाने के लिए संघर्ष कर रहे है, ख़ास कर क्रिमिनल मानहानि की धारा को
अब बात करते है उस कंप्लेंट की जिसके आर्डर में सर्वोदया हॉस्पिटल के पार्टर्नर्स डॉ राजेश अग्रवाल, डॉ कपिल गुप्ता, डॉ संजय मित्तल, डॉ अनवर इब्राहिम खान के साथ इनके चार्टर्ड अकाउंटेंट संदीप कुमार सिंह के खिलाफ जालंधर की अदालत ने ऍफ़ आई आर दर्ज करने के आर्डर किये हैं, इस क्रिमिनल कंप्लेंट में डॉ पंकज त्रिवेदी ने crpc की धारा 156(3) के तहत अदालत में अर्जी डाली थी और आरोप लगाया था की सर्वोदया हॉस्पिटल की एक बैलेंस शीट 10/12/2019 को हॉस्पिटल के उस समय के 10 पार्टनर्स मेसे 9 के सिग्नेचर के बाद फाइनल की गई थी, पर बाद में बतौर डॉ पंकज त्रिवेदी उन्हें पता चला की एक अन्य बैलेंस शीट बनाई गई जिसपे सिर्फ डॉ कपिल गुप्ता, डॉ राजेश अग्रवाल और डॉ संजय मित्तल के सिग्नेचर थे और इसे नए अपोइंटेड चार्टर्ड अकाउंटेंट संदीप कुमार सिंह ने बनाया था, आगे डॉ पंकज त्रिवेदी आरोप लगाते है की वो भी हॉस्पिटल में पार्टनर थे पर हॉस्पिटल का नया चार्टर्ड अकाउंटेंट अपॉइंट करते समय उनकी मजूरी नहीं ली गई और उन्हें कभी पता ही नहीं था की संदीप कुमार सिंह को चार्टर्ड अकाउंटेंट रखा गया है, डॉ पैकेज त्रिवेदी का आरोप है की संदीप कुमार सिंह ने ही नई जाली बैलेंस शीट तैयार की है, डॉ पंकज त्रिवेदी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है की संदीप कुमार सिंह द्वारा बनाई गई बैलेंस शीट में दिख रहा है की डॉ कपिल गुप्ता, डॉ राजेश अग्रवाल, डॉ संजय मित्तल, डॉ अनवर इब्राहिम खान को हॉस्पिटल के खाते से सैलरी और अन्य खर्चे दिया गए है जब की हॉस्पिटल 1.27 करोड़ रुपये घाटे में था ऐसे में हॉस्पिटल के किसी भी डॉक्टर को पैसे कहाँ से दिए गए? इन्ही सब दलीलों को ध्यान में रखते हुए जालंधर की अदालत ने जालंधर पुलिस को आदेश दिया है की डॉ कपिल गुप्ता, डॉ राजेश अग्रवाल, डॉ संजय मित्तल और डॉ अनवर इब्राहिम खान के साथ उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट संदीप कुमार सिंह के खिलाफ एक ऍफ़ आई आर सेक्शन आई पी सी 420, 465, 467, 468, 471, 477A और 120B के तहत तुरंत दर्ज की जाये, अगर डॉ पंकज त्रिवेदी के आरोप सही हैं तो डॉ राजेश अग्रवाल पक्ष ने साफ़ तौर पर डॉ पंकज त्रिवेदी का हक़ मारने का काम किया है और उनके साथ धोखा किया है, कोर्ट आर्डर को पढ़ने के बाद लगता है की अगर ये आरोप सही हैं तो डॉ राजेश अग्रवाल और उनके साथी डॉक्टर्स के खिलाफ ये आरोप मजबूत हैं और उम्मीद है की यह केस लॉजिकल एन्ड तक पहुंचेंगे, इस कंप्लेंट की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने एक बात आई की डॉ पंकज त्रिवेदी की इस कंप्लेंट पर डी ये लीगल की रिपोर्ट में साफ़ तौर कहा गया था की डॉ राजेश अग्रवाल, डॉ कपिल गुप्ता, डॉ संजय मित्तल, डॉ अनवर इब्राहिम खान और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट संदीप कुमार सिंह के खिलाफ मामला दर्ज होना बनता है पर इसके बाद भी पुलिस ने ऍफ़ आई आर दर्ज नहीं की थी और डॉ पंकज त्रिवेदी को अदालत में कंप्लेंट डालनी पड़ी थी, इस कंप्लेंट की सुनवाई के दौरान सम्बंधित थाना नवी बारादरी के एस एच वो ने कहा है की उन्हें डी ये लीगल की रिपोर्ट मिली ही नहीं थी, जो हजम होने वाली स्टेटमेंट नहीं लगती ऐसे में जांच करने वाले एस एच वो और सिट को लीड करने वाले उस समय के डी सी पी(इन्वेस्टीगेशन) हरविंदर सिंह विर्क(पी पी एस ) की भी विभागीय जांच होनी चाहिए
इस स्टोरी को लिखने का मकसद सिर्फ इतना है की जनता ये जानती रहे की लोगो की जान बचाने वाले डॉक्टर्स कैसे आपस में पैसों के लिए लड़ रहे हैं, ये झगड़ा किसी सामान्य बिज़नेस पार्टीज के बीच होता तो कोई बड़ी बात नहीं होती पर पढ़े लिखे और लोगों की सेवा करने की कसमें खाने वाले डॉक्टर्स के बीच पैसों को लेकर ऐसी कानूनी जंग जनता को क्या मेसेज देती है इसपे जनता खुद अपनी राय बनाये
