breaking news: जालंधर के तथाकथित डिजिटल पत्रकार गुरदीप सिंह की अग्रिम जमानत निचली अदालत से ख़ारिज, अब जाना होगा हाई कोर्ट..

 जालंधर(22/04/2026): दोस्तों आप सबको अपने पिछले आर्टिकल में बताया था की कैसे कुछ डिजिटल तथाकथित पत्रकारों की वजह से रोज़ कहीं न कहीं से खबर आ जाती है की पत्रकारिता को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है इसी सिलसिले में जालंधर के एक तथाकथित डिजिटल पत्रकार गुरदीप सिंह के कारनामों पर रौशनी डाली थी साथी ही बताया था की इन जनाब पर हाल ही में एक ऍफ़ आई आर दर्ज हुई है जिसमे जबरन उगाही, ट्रेस पास के साथ साथ जाती सूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं 

22/04/2026 को जालंधर की एक अदालत में इनकी अंतरिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई हुई जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया है, अदालत में आरोपित पत्रकार साहिब के वकील ने दलील दी की जाती सूचल शब्दों के इस्तेमाल का मामला बनता ही नहीं क्योकि जो भी बात चीत हुई है वो एक गैस एजेंसी के दफ्तर में हुई जो की एक पब्लिक प्लेस नहीं है इस लिए जाती सूचक शब्द बोलने का जुर्म नहीं बनता है 

इस मामले को सुनने वाले जज ने अपने आर्डर में लिखा है की गैस एजेंसी के दफ्तर में काफी स्टाफ के लोग थे, कई सारे ग्राहक थे इसलिए ये कहना की वहाँ पब्लिक मौजूद नहीं थी ये बात गलत है क्योकि वहाँ मौजूद २ अलग अलग ग्राहकों ने मामले में गवाही दी है वो भी तो पब्लिक का हिस्सा ही है, और अर्जी को ख़ारिज कर दिया, ऍफ़ आई आर में मौजूद अन्य धाराओं पर अदालत ने बात नहीं और कहा की अगर अग्रिम जमानत बनती ही नहीं तो अन्य धाराओं पर बात करने का क्या मतलब है 

इस मामले में भी आरोपित गुरदीप सिंह तलवार के वकील ने टेक्निकल ग्राउंड पर जमानत मांगी थी जो मिलनी बनती भी नहीं थी, पर मुख्य सवाल अभी भी खड़ा है की शिकयतकर्ता की जाती के बारे में गुरदीप सिंह को कैसे पता था क्या गुरदीप सिंह शिकयतकर्ता को पहले से जानता था अगर ऐसे नहीं है तो इस जाती सूचक शब्दों के इस्तेमाल वाली बात पर सवाल खड़े होने जरूरी हैं

अब गुरदीप सिंह के पास अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट जाने का विकल्प मौजूद है जहाँ से अग्रिम जमानत मिलने की संभावना ज्यादा रहेगी



 

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